आलोक वर्मा ने नहीं मानी सरकार की बात, अब क्या होगा: प्रेस रिव्यू
इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक सीबीआई निदेशक पद से हटाए गए आलोक वर्मा ने सरकार के निर्देशों का पालन न करते हुए अग्निशमन सेवाओं, नागरिक सुरक्षा और होम गार्ड्स विभाग के महानिदेशक का पद संभालने से इनकार कर दिया.
गृह मंत्रालय ने बुधवार को वर्मा को एक चिट्ठी भेजकर इन सारे विभागों का कार्यभार तुरंत संभालने को कहा था. चूंकि आलोक वर्मा का कार्यकाल 31 जनवरी को ख़त्म हो रहा था इसलिए उन्हें ये पद सिर्फ़ एक दिन के लिए संभालना था लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया और कहा कि उन्हें सेवानिवृत्त माना जाए.
ये भी पढ़ें: आलोक वर्मा को कहा, एक दिन कार्यभार संभालें
अख़बार गृह मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से लिखता है कि निर्देशों का पालन न करने बाद अब वर्मा को विभागीय कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है. गृह मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक अगर वर्मा पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हुई तो उनकी पेंशन भी रोकी जा सकती है.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया में एक रिपोर्ट छपी है जिसके मुताबिक भारत में महिला मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है. रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत के दो बड़े राज्यों महाराष्ट्र और तमिलनाडु में पुरुष और महिला मतदाताओं की संख्या के बीच का फ़र्क तेजी से कम होता नज़र आ रहा है. तमिलनाडु में तो रजिस्टर्ड महिला वोटरों की संख्या पुरुष वोटरों से कहीं ज़्यादा हो गई है.
गुरुवार को जारी किए गए हालिया आंकड़ों के मुताबिक तमिलनाडु में कुल 5.91 करोड़ मतदाता हैं जिनमें 2.92 करोड़ पुरुष हैं और 2.98 करोड़ महिलाएं. राज्य में पिछले पांच साल में पुरुष मतदाताओं की संख्या में 8.5% का इजाफ़ा हुआ है जबकि महिला मतदाताओं की संख्या में 11% की बढ़त हुई है.
2014 के आम चुनाव में केरल, अरुणाचल प्रदेश, मिज़ोरम, मणिपुर, मेघालय और पुदुचेरी में पहले ही महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों के मुक़ाबले ज़्यादा थी. अब तमिलनाडु भी ऐसे राज्यों की सूची में शामिल हो गया है और महाराष्ट्र भी इसी रास्ते पर बढ़ रहा है.
हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के मुताबिक़ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमला मुद्दे पर फ़ैसला सुनाते हुए करोड़ों हिंदुओं की भावनाओं का ख़याल नहीं रखा.
भागवत ने ये बातें प्रयागराज के कुंभ मेले में विश्व हिंदू परिषद् द्वारा आयोजित धर्म संसद में कहीं. उन्होंने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमला मंदिर में महिलाओं को प्रवेश की इजाज़त दी तब उसने ये नहीं सोचा कि इससे करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचेगी.
भागवत ने कहा, "अदालत ने कहा कि जो भी महिला मंदिर में जाना चाहे वो जा सकती है और अगर उसे मंदिर के भीतर प्रवेश करने से रोका जाता है तो उसे सुरक्षा मुहैया कराई जाए. लेकिन कोई भी भारतीय श्रद्धालु महिला मंदिर में जाना ही नहीं चाहती थी इसलिए श्रीलंका से एक महिला को बुलाकर मंदिर के पिछले दरवाजे से प्रवेश दिलाया गया."
केरल के सबरीमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर दक्षिणपंथी संगठन शुरुआत से अपना विरोध दर्ज कराते रहे हैं.
इससे पहले बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट को ऐसे फ़ैसले नहीं देने चाहिए जिन्हें लागू करना व्यावहारिक न हो. इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा था कि सबरीमला लैंगिक असमानता का मुद्दा नहीं बल्कि आस्था का विषय है.
अब इस मामले में दायर की गई पुनर्विचार याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ छह फ़रवरी को सुनवाई करेगी.
नवभारत टाइम्स की ख़बर के मुताबिक दिल्ली हाई कोर्ट ने बंदरों के बढ़ते उत्पात को देखते हुए उनकी नसबंदी की इजाज़त दे दी है.
हाई कोर्ट की मंजूरी के बाद अब दिल्ली सरकार के वाइल्ड लाइफ़ डिपार्टमेंट के अधिकारियों को आदेश दिया गया है कि वो बंदरों की नसबंदी शुरू कर दें. दिल्ली में बंदरों की संख्या एक लाख के क़रीब है और इनकी आबादी को नियंत्रित करने के लिए पहले चरण में 25 हज़ार बंदरों की नसबंदी की जाएगी.
दिल्ली के कई इलाकों में लोगों को बंदरों की वजह से खासी परेशानी उठानी पड़ती है. कई बार तो बंदर संसद भवन के परिसर तक में घुस जाते हैं. इससे पहले बंदरों को पकड़कर जंगल में छोड़ा गया और उन्हें डराकर भगाने के लिए लंगूर लाए गए लेकिन इससे कुछ ख़ास फ़ायदा नहीं हुआ.
बंदरों के आतंक को स्थायी तौर पर हल करने के लिए न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी रेज़िडेंट वेलफ़ेयर असोसिएशन ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की थी जिसके सुनवाई में अदालत ने बंदरों की नसबंदी को मंजूरी दी.
गृह मंत्रालय ने बुधवार को वर्मा को एक चिट्ठी भेजकर इन सारे विभागों का कार्यभार तुरंत संभालने को कहा था. चूंकि आलोक वर्मा का कार्यकाल 31 जनवरी को ख़त्म हो रहा था इसलिए उन्हें ये पद सिर्फ़ एक दिन के लिए संभालना था लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया और कहा कि उन्हें सेवानिवृत्त माना जाए.
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अख़बार गृह मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से लिखता है कि निर्देशों का पालन न करने बाद अब वर्मा को विभागीय कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है. गृह मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक अगर वर्मा पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हुई तो उनकी पेंशन भी रोकी जा सकती है.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया में एक रिपोर्ट छपी है जिसके मुताबिक भारत में महिला मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है. रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत के दो बड़े राज्यों महाराष्ट्र और तमिलनाडु में पुरुष और महिला मतदाताओं की संख्या के बीच का फ़र्क तेजी से कम होता नज़र आ रहा है. तमिलनाडु में तो रजिस्टर्ड महिला वोटरों की संख्या पुरुष वोटरों से कहीं ज़्यादा हो गई है.
गुरुवार को जारी किए गए हालिया आंकड़ों के मुताबिक तमिलनाडु में कुल 5.91 करोड़ मतदाता हैं जिनमें 2.92 करोड़ पुरुष हैं और 2.98 करोड़ महिलाएं. राज्य में पिछले पांच साल में पुरुष मतदाताओं की संख्या में 8.5% का इजाफ़ा हुआ है जबकि महिला मतदाताओं की संख्या में 11% की बढ़त हुई है.
2014 के आम चुनाव में केरल, अरुणाचल प्रदेश, मिज़ोरम, मणिपुर, मेघालय और पुदुचेरी में पहले ही महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों के मुक़ाबले ज़्यादा थी. अब तमिलनाडु भी ऐसे राज्यों की सूची में शामिल हो गया है और महाराष्ट्र भी इसी रास्ते पर बढ़ रहा है.
हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के मुताबिक़ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमला मुद्दे पर फ़ैसला सुनाते हुए करोड़ों हिंदुओं की भावनाओं का ख़याल नहीं रखा.
भागवत ने ये बातें प्रयागराज के कुंभ मेले में विश्व हिंदू परिषद् द्वारा आयोजित धर्म संसद में कहीं. उन्होंने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमला मंदिर में महिलाओं को प्रवेश की इजाज़त दी तब उसने ये नहीं सोचा कि इससे करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचेगी.
भागवत ने कहा, "अदालत ने कहा कि जो भी महिला मंदिर में जाना चाहे वो जा सकती है और अगर उसे मंदिर के भीतर प्रवेश करने से रोका जाता है तो उसे सुरक्षा मुहैया कराई जाए. लेकिन कोई भी भारतीय श्रद्धालु महिला मंदिर में जाना ही नहीं चाहती थी इसलिए श्रीलंका से एक महिला को बुलाकर मंदिर के पिछले दरवाजे से प्रवेश दिलाया गया."
केरल के सबरीमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर दक्षिणपंथी संगठन शुरुआत से अपना विरोध दर्ज कराते रहे हैं.
इससे पहले बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट को ऐसे फ़ैसले नहीं देने चाहिए जिन्हें लागू करना व्यावहारिक न हो. इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा था कि सबरीमला लैंगिक असमानता का मुद्दा नहीं बल्कि आस्था का विषय है.
अब इस मामले में दायर की गई पुनर्विचार याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ छह फ़रवरी को सुनवाई करेगी.
नवभारत टाइम्स की ख़बर के मुताबिक दिल्ली हाई कोर्ट ने बंदरों के बढ़ते उत्पात को देखते हुए उनकी नसबंदी की इजाज़त दे दी है.
हाई कोर्ट की मंजूरी के बाद अब दिल्ली सरकार के वाइल्ड लाइफ़ डिपार्टमेंट के अधिकारियों को आदेश दिया गया है कि वो बंदरों की नसबंदी शुरू कर दें. दिल्ली में बंदरों की संख्या एक लाख के क़रीब है और इनकी आबादी को नियंत्रित करने के लिए पहले चरण में 25 हज़ार बंदरों की नसबंदी की जाएगी.
दिल्ली के कई इलाकों में लोगों को बंदरों की वजह से खासी परेशानी उठानी पड़ती है. कई बार तो बंदर संसद भवन के परिसर तक में घुस जाते हैं. इससे पहले बंदरों को पकड़कर जंगल में छोड़ा गया और उन्हें डराकर भगाने के लिए लंगूर लाए गए लेकिन इससे कुछ ख़ास फ़ायदा नहीं हुआ.
बंदरों के आतंक को स्थायी तौर पर हल करने के लिए न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी रेज़िडेंट वेलफ़ेयर असोसिएशन ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की थी जिसके सुनवाई में अदालत ने बंदरों की नसबंदी को मंजूरी दी.
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